ज़ेनजी की उम्दा पहल
ज़ेनजी की उम्दा पहल : ****************** और भागो विकास के पीछे.... दौड़ते दौड़ते थकोगे नहीं क्या... आख़िर क्या सोचकर पुरानी सब चीज़ छोड़कर नए को अपनाने लगे... क्या नए से सिर्फ़ फायदा ही फायदा मिला तुम्हें....ऐसे बहुत से सवाल आज के अंधे विकास को देखकर खड़े हो रहे हैँ। जिनका जवाब है पर उसे स्वीकारने में बहुत से लोगों को शर्म आ रही है। लेकिन ये ज़ेनजी भई..... ये तो गज़ब ही है। शुरू में मुझे भी लगता था कि ये लापरवाह हैँ ख़ुद में जीते है इन्हें जमाने समाज कि कोई परवाह नहीं, भविष्य कि कोई चिंता नहीं वगैरह बहुत से मसले.... पर ज़ब से हिंदुस्तान में ज़ेनजी ने आंदोलन किया तब से इस group की समझ, मुझे समझ आयी। हमारी पीढ़ी ने दुनिया जमाने कि परवाह करके क्या ही जी लिया। बस चार लोग क्या कहेंगे यही सोचते रहे। कल का पता नहीं कि आज सो रहे कल सुबह उठेंगे या नहीं ये भी पता नहीं फ़िर भी भविष्य कि चिंता में घुटते रहना। बहुत से ऐसे काम जो हमें पसंद नहीं बस सामाजिक हैँ इसलिए करना। बिना वजह के पैच्चिसों तरह के आयोजनों में अपनी जमा पूंजी खत्म कर देना... जबकि उसी में मीन मेख निकालने के लिए बहुत से लोग आत...






